25 मार्च को कानपुर कमिश्नरेट को एक साल हो गए हैं। अपराध की रोकथाम के लिए प्रिडिक्टिव पुलिसिंग का प्रयोग देश में पहली बार किया जा रहा है। यूपी पुलिस और आईआईटी कानपुर के बीच हुए एमओयू साइन हो चुका है।
कानपुर के पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा ने कहा था कि क्राइम कंट्रोल के लिए तकनीकी संस्थानों की मदद ली जाएगी। ऐसी ही तकनीक पर शहर के पूर्व कमिश्नर और योगी सरकार में मंत्री असीम अरुण ने भी आईआईटी की मदद से एक ऐसी तकनीक तैयार करवाई थी। जो अपराध होने की अधिक संभावना का संकेत देगी। ताकि पुलिस तेजी से रिस्पांस कर सके। इसी को प्रिडिक्टिव पुलिसिंग सॉफ्टवेयर कहा गया।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कम समय घटनास्थल पर पहुंचेगी पुलिस
आईआईटी कानपुर एक ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया गया है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से पुलिस को पहले ही बता देगा कि किस जगह गश्त करने से क्राइम को रोका जा सकता है। कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी कानपुर के प्रो. निशीथ श्रीवास्तव ने इस सॉफ्टवेयर को डेवलप किया है। उन्होंने बताया कि हमने इस सॉफ्टवेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से 112 पर आने वाली सारी कॉल्स को मॉनिटर करेंगे। साथ ही, पिछले चार-पांच वर्षों के आंकड़ों से ये तय किया जाएगा कि अपराध किस जगह ज्यादा हो रहे है।
समय भी बताएगा यह सॉफ्टवेयर
जिस तरह से कंट्रोल रूम में कॉल्स आएगी। विशेष इलाकों में रिपोर्ट किए गए अपराधों के प्रकार, महिलाओं और बच्चों से संबंधित अपराध, साइबर अपराध और कई अन्य चीजों का विश्लेषण करके पुलिस को भविष्य में कहां गश्त करनी है वो भी बताएगी।
3 थानों में चल रही है टेस्टिंग
इस सॉफ्टवेयर का परीक्षण शहर के 3 थानों में चल रहा है। जिसमें कल्याणपुर, पनकी और बिठूर शामिल है। अगले हफ्ते तक तीन अन्य थानों में भी इस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया जाएगा। एक महीने के ट्रायल के बाद कमियों को दूर करके इसे कमिश्नरेट में लागू किया जा सकता है।
No comments:
Post a Comment